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Essay On Smoking In Hindi

तम्बाकू एक धीमा जहर है जो सेवन करने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे करके मौत के मुँह मे धकेलता रहता है। लोग जाने अनजाने मे तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते रहते है, धीरे धीरे शौक लत मेँ परिवर्तित हो जाता है और तब नशा आनंद प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि ना चाहते हुए भी किया जाता है एक शायर ने क्या खूब कहा है –

कौन कमबख्त पीता है मजा लेने के लिए,
हम तो पीते हैं क्योंकि पीनी पड़ती है !

तम्बाकू उत्पादों का सेवन अनेक रूप में किया जाता है, जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, जर्दा, खैनी, हुक्का, चिलम आदि। सिगरेट, बीडी और हुक्के का हर कश एवं गुटखे, जर्दे, खैनी की हर चुटकी हर पल मौत की ओर ले जा रही होती है।

कौन किसे जलाता है !

तम्बाकू उत्पादों के सेवन से नुकसान / Harmful effects of tobacco in Hindi

  • तम्बाकू में मादकता या उतेजना देने वाला मुख्य घटक निकोटीन (Nicotine) है यही तत्व सबसे ज्यादा घातक भी है।
  • इसके अलावा तम्बाकू मे अन्य बहुत से कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पाये जाते है।
  • धुम्रपान एवँ तम्बाकू खाने से मुँह् ,गला, श्वासनली व फेफडोँ का कैंसर (Mouth, throat and lung cancer ) होता है।
  • दिल की बीमारियाँ (Heart Disease )
  • धमनी काठिन्यता,उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure )
  • पेट के अल्सर (Stomach Ulcer ),
  • अम्लपित (Acidity),
  • अनिद्रा (insomnia) आदि रोगों की सम्भावना तम्बाकू उत्पादों के सेवन से बढ़ जाती है।

तम्बाकू की लत के कारण / Cause of tobacco addiction in Hindi

कभी दूसरों की देखा देखी, कभी बुरी संगत मे पडकर कभी मित्रो के दबाब में, कई बार कम उम्र मेँ खुद को बडा दिखाने की चाहत में तो कभी धुएँ के छ्ल्ले उडाने की ललक,कभी फिल्मों मे अपने प्रिय अभिनेता को धूम्रपान करते हुए देखकर तो कभी पारिवारिक माहौल का असर तम्बाकू उत्पादों की लत का कारण बनता है। अधिकतर लोग किशोरावस्था या युवावस्था मेँ दोस्तोँ के साथ सिगरेट, गुट्खा, जर्दा, आदि का शौकिया रूप मेँ सेवन करते है शौक कब आदत एवँ आदत लत मे बदल जाती है पता ही नहीं चलता और जब तक पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुक्सान पहुँच चुका होता है।

धूम्रपान, जर्दा, खैनी आदि नशा छोडने के उपाय ( How to quit tobacco / smoking  in Hindi )

1. नशा छोड्ने का मन से निश्चय करेँ।

2. यदि नशा एक बार मेँ झटके से छोड्ना मुश्किल लगे तो धीरे धीरे मात्रा कम करते हुए छोड़ें।

3. सभी मित्रोँ,परिचितों को बता दें कि आपने नशा छोड दिया है ताकि वे आपको नशा करने के लिये बाध्य ना करेँ।

4. डायरी लिखेँ कि आप कब और कितनी मात्रा मे नशा करते हैं क्या कारण है जो आपको नशा करने के लिये प्रेरित होते  हैं।

5. अपने पास सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू, एवँ माचिस आदि रखना छोड देँ।

6. खान पान एवं लाइफ स्टाइल में सुधार करें।

नशा छोड़ने के आयुर्वेदिक तरीके / Ayurvedic Ways to Quit Tobacco / Smoking

7. 50 ग्राम सौंफ एवँ इतनी ही मात्रा मेँ अजवायन लेकर तवे पर भूने, थोडा नींबू का रस एवँ हल्का काला नमक डाल लेँ। एक डब्बी में रखकर अपनी जेब में रख लें। जब भी सिगरेट एवँ तम्बाकू आदि की तलब लगे तो कुछ दाने मुँह मेँ रख लेँ एवं चबाते रहे इससे तलब कम होगी,अजीर्ण ( indigestion),अरुचि (Anorexia),गैस (Gas, Acidity) में आराम मिलेगा।
8. गुनगुने पानी मे नींबू का रस एवँ शहद डालकर पीना तलब को कम करता है तथा नशे के विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है।

9. एक पुडिया मे सूखे आँवले के टुकडे, इलायची ,सौंफ, हरड के टुकडे रखेँ ताकि जब तलब लगे तो कुछ टुकडे मुँह में रखें और चबाते रहें इनसे तलब ( Craving) तो कम होती ही साथ ही खट्टी डकार ,भूख ना लगना (lack of appetite ),पेट फूलने में आराम मिलता है।

नशा छोड़ते वक़्त क्या परेशानी आ सकती है ? / Withdrawal Symptoms in Hindi

सिगरेट ,बीडी,एवं अन्य तम्बाकू उत्पादोँ का नशा छोड्ने पर अनेक लक्षण उत्पन्न हो जाते है जो बहुत परेशान करते है इन्हे विड्रावल लक्षण ( Withdrawal Symptoms ) कहते है जैसे:

  • चिंता ( Stress,anxiety)
  • बेचैनी (Restlessness)
  • भूख ना लगना (lack of appetite )
  • ह्रदय की धडकन बढना (Palpitation)
  • नींद ना आना (lack of sleep)
  • ज्यादा पसीना आना (Excessive sweating)
  • नशे की तीव्र इच्छा होना ( Craving )
  • अवसाद ( Depression )
  • सिर दर्द आदि।

यदि लक्षण ज्यादा गम्भीर ना हों जो कि इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति नशा कितने समय से और कितनी मात्रा मे कर रहा है तो ऐसी स्तिथि मे आयुर्वेद की जड़ी बूटियां एवं औषधियां बहुत फायदेमंद होती हैं, जैसे-असगंध ,ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामांसी ,आंवला ,हरड, त्रिफला,मुलहठी ,सौंफ,इलायची,लवण भास्कर ,द्राक्षासव,अश्वगंधा अवलेह,अग्निटुंडी आदि बहुत उपयोगी हैं जिन्हे चिकित्सक की राय से सेवन किया जा सकता है।

31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस / World No Tobacco Day मनाया जाता है आइये इस अवसर पर हम संकल्प लें कि खुद भी नशा नही करेंगे और अन्य लोगो को भी नशा ना करने के लिये प्रोत्साहित करेंगे।

क्योंकि- Addiction is Death !

Dr. Manoj Gupta

Dr.Manoj Gupta

B-3 Palam Vihar, Gurgaon (Haryana)
Mob & WhatsApp#: 09929627239
Email:[email protected]
Blog:drmanojgupta.blogspot.in(plz visit for Health Articles in Hindi)

डॉ० मनोज गुप्ता राज्य स्तरीय आयुर्वेद के सर्वोच्च पुरस्कार धन्वंतरि पुरस्कार से सम्मानित सीनियर आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए आपको माननीय स्वास्थ्य मन्त्री तथा अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। आपके लेख राजस्थान पत्रिका, निरोगसुख  जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में पब्लिश होते रहे हैं।

 कृपया इस लेख को उन लोगों से ज़रूर शेयर करें जो तम्बाकू सेवन के आदि हों। 

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We are grateful to Dr. Manoj Gupta for sharing this informative Hindi article on the occasion of World No Tobacco Day.

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Filed Under: Health Articles In Hindi, Health In Hindi, Hindi Essay, हिंदी निबंधTagged With: Dr. Manoj Gupta, स्वास्थ्य

 

नए शोध यह बताते हैं की धूम्रपान छोड़ने के बाद भी धूम्रपान से होने वाला स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम कम नहीं होता। यह सुनकर सिर्फ धूम्रपान करने वालो को ही धक्का नहीं लगा होगा बल्की उन लोगो को भी सदमा लगा होगा जिन्होंने आखिरी बार सिगरेट पी थी और यह संकल्प लिया था की वो अब इसे बंद कर देंगे । यूनिवर्सिटी आफ सिडनी के शोधको ने यह पाया है की धूम्रपान आपके हवा नाल की ऊतकों में ऐसे बदलाव कर सकता है की धूम्रपान छोड़ने के बाद भी वो क्षति रूकती नहीं है ।


धूम्रपान करने वाले क्रोनिक ओब्स्त्रक्तिव पल्मोनरी डिजीज से ग्रसित हो जाते है (सीओपीडी)जो की तब भी नहीं रूकती है जब व्यक्ति ने धूम्रपान छोड़ दिया होता है । स्वस्थ होने के अन्य संकेत भी नजर आते हैं लेकिन फेफडो में नुक्सान धूम्रपान छोड़ने के बाद भी लंबे समय के लिए चलता है । साल २०२० तक ऎसी गाडना की गयी है की सीओपीडी मौत के तीन मुख्य कारणों में से एक बन जाएगा ।इसका मुख्य कारण है की वातावरण में प्रदूषण और सिगरेट से धूम्रपान करने वालो की संख्या लगातार बढती जा रही है  ।


यूनिवर्सिटी आफ सिडनी के शोधक ने यह बताया है की धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के फेफडो में कैंसर कराने वाले तत्व अपना आप बढते रहते है व्यक्ति के धूम्रपानछोड़ने के बाद भी ।सिगरेट के धुएं के द्वारा उत्तेजित होने के बाद कोशिआके के बहार की मेट्रिक्स का विकास उस तरह से नहीं होता है जैसा की तब होता था जब व्यक्ति धुएं के संपर्क में नहीं आया था ।


इस खोज से आपको यह नहीं समझना चाहिए की धूम्रपान बंद करने का कोई फायदा नहीं है ।फेफडो में प्रदाह रह सकता है लकिन इसको छोड़ने के अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हैं ।इस शोध से उन डॉक्टरो को नयी चुनौतीयाँ मिली है जो की धूम्रपान से सम्बन्धित फेफडो के रोगों का इलाज कर रहे हैं ।उर जैसे की धूम्रपान करने वाले लोगो के लिए यह एक बहुत ही पुख्ता कारण है की उन्हें धूम्रपान छोड़ देना चाहिए और उन्हें इस बात की उम्मीद करनी चाहिए की अह्बी तक उन्हें कोई क्षतिनाहीं पहुंची है ।